सुभद्राकुमारी चौहान की कविता   
HOME
HOME BANGLA
सुभद्राकुमारी चौहान  का जन्म इलाहाबाद में हुआ था । क्रास्थवेरट गर्ल्स कालेज, प्रयाग मे वह छात्रा
थी। 15 वर्ष की अवस्था में उनका विवाह खंडवा के वकील लक्ष्मण सिंह चौहान से हो गया था। पति पत्नि
दोनो ही राष्ट्रीय विचारधारा के होने से महात्मा गांधी से  प्रभावित होकर, सुभद्राजी पड़ाइ तथा लक्ष्मणजी
वकालत छोड़ कर स्वतंत्रता के आंदोलन मे कुद पड़े। इसी लिये इन्हे कइ बार जेल भी जाना पड़ा।

सुभद्राजी की कविताओं में देश प्रेम की भावना और मातृत्व ही मुल आधार है। उनकी कविता "झाँसी की
रानी लक्ष्मी बाई" के "खूब लड़ी मरदानी वह तो झाँसी वाली रानी थी..." सुनकर आज भी हम देश भक्ति
की  भावना से हर्षित हो उठते हैं। इनकी भाषा सरल तथा शुद्ध खड़ी बौली है। "त्रिधारा" और "मुकुल" इनके
काव्य संकलन तथा "बिखरे मोती" और "उन्मादिनी" प्रसिद्ध कहानी संग्रह है। इनके काव्य संग्रह मुकुल के
लिये 1931 में उन्हे साहित्य सम्मेलन प्रयाग द्वारा "सेक्सरिया पुरस्कार" प्रदान किया गया।

1948 में एक मोटर दुर्घटना में उनका देहांत हो गया।

अगर आपको कहीं ग़लती नज़र आता है तो इस विषय पर आप का टिप्पणी, जो हमारे लिये बहुत ही
मूल्यवान होगा, इस पते पर भेजिये -
srimilansengupta@yahoo.co.in   
सुभद्राकुमारी चौहान
1904 ~ 1948