कवि तापसकिरण राय  के पिता का नाम स्वर्गीय शैलेश चन्द्र राय। उनका जन्म
बंगलादेश के ढाका मे हुआ था।

बंगाल बिभाजन के फल स्वरूप अपने जन्म भूमि को त्यागना पड़ा। छोड़ना पड़ा अपने
घरद्वार के साथ साथ हजारों बीघा उर्बर खेती-जमीन को भी। 1951 साल में पिता माता
के साथ पश्चिम बंगाल के बर्धमान शहर में आकर रहने लगे। शैशव में पिता माता के संग
घूमना पड़ा पश्छिम बंगाल के अंतर्गत बर्धमान, कोलकाता, रानाघाट आदी स्थान पर।
इस के पश्चात प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की पड़ाई की समाप्ति के बाद 1966 के
ओक्टूबर में पिता माता के साथ दंडकारन्य प्रोजेक्ट में पहुचें, जो मध्य प्रदेश और उड़िस्सा
के सीमावर्ती कुछ अंशों में स्थित है। आर्थिक दैन्यता के कारण पिता ने शिक्षक की नौकरी
लेकर परिवार के साथ यंहा आ गयें। कवि को भी दुर्बल आर्थिक अबस्था के कारण
प्राथमिक शिक्षक की नौकरी ग्रहण करनी पड़ी। बाद में पदोन्नती के पश्चात उच्च विद्यालय
के शिक्षक बनें। नौकरी के अवसर पर कोलकाता विश्वविद्यालय से बी.ए. परीक्षा पास की।
रायपुर रविशंकर बिश्वबिद्यालय से एम्.ए. तथा भोपाल विश्वविद्यालय से बी.एड. परीक्षा भी
उत्तीर्ण हुए।

लेखक पन्द्रह वर्ष से विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लिखना शुरू किया। उन्होंने अधिक से
अधिक कविता लिखी। लिखन कार्य 1965 से 1971 तक चलता रहा। कोलकाता के
अनेकानेक पत्रिकाओं में कविताएँ छपीं गई। सुप्रसिध्य लेखक बिमल मित्र की बंगला
पत्रिका 'कली व कलम', कोलकता की बेतार केंद्र से प्रकाशित पत्रिका 'बेतार जगत',
आकाशवाणी कोलकाता के मजदूर मंडली कार्यक्रम के परिचालक, सत्य चरण घोष
महोदय के सम्पादित पत्रिका 'आसर' में कवि की कविताएँ प्रकाशित हुईं। यूगान्तर
पत्रिका में कवि की कविता पर प्रशंशा की गयीं। इसके अतिरिक्त, कवि के स्मरण के
बाहर और कुछ पत्रिकाओं में भी लेख छपे गये। 1971 के बाद किसी व्यक्तिगत कारण
दीर्घ चालीश साल के उपर लेखक का लिखना प्राय बंध रहा।

इस अवसर पर कवि ने कुछ हिंदी कवितायं लिखीं। इन कविताएं नव भारत, दैनिक
भाष्कर, नवीन दुनिया, देश बन्धु आदी पत्रिकाओं में प्रकाशित हुयें। जबलपुर बेतार
केंद्र में से लेखक के कविता पाठ का कार्यक्रम बहुत बार प्रसारण कियें गयें। व्यक्तिगत
रूप से तथा लेख के माध्यम से श्रध्येय ताराशंकर बन्दोंपाध्याय महाशय एवं बिमल मित्र
महाशय के साथ पत्रालाप रहें। प्रोजेक्ट में रहते समय बिमल मित्र महाशय से एकाधीक
बार मुलाकात भी हुईं। दंडकारन्य पोजेक्ट में बस्तर जिले के कोंडागांव के सभामंच पर
लेखक के प्रश्न के उत्तर में बिमल मित्र महाशय ने कहा था-- नये कवि लेखक के सब से
बरी समस्या होती है धैर्य रख कर काम करना... ।

बाद में दंडकारन्य प्रोजेक्ट बंध हो जाने के पश्चात कवि आयकर बिभाग, जबलपुर
(एम्.पी.) में पुनर्बहाल हुए। कवि ने उसी बिभाग व स्थान से ३० एप्रील २०१० में
निरीक्षक पद से अबसर ग्रहण किया।

वर्तमान में हिंदी के साथ साथ बंगला में भी लिखना जारी है।

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