अरे अरे सखी बार बार छि छि ठारत चंचल अँखिया साँवलिया । दुरु दुरु गुरु गुरु काँपते हिया ऊरु हाथ से गिर जाए कुमकुम थालिया ।। आर न होरी खेलबो गोरी आबीर फाग दे पानी में डारी हा प्यारी--- श्याम कि फागुआ लाल की लगुआ छि छि मोरी शरम धरम सब हारी मारे छातिया मे कुमकुम बे-शरम बानिया ।।
अगर तुम राधा होते श्याम। मेरी तरह बस आठों पहर तुम, रटते श्याम का नाम ।। वन-फूल की माला निराली वन जाति नागन काली कृष्ण प्रेम की भीख मांगने आते लाख जनम । तुम, आते इस बृजधाम ।। चुपके चुपके तुमरे हिरदय में बसता बंसीवाला ; और, धीरे धारे उसकी धुन से बढ़ती मन की ज्वाला । पनघट में नैन बिछाए तुम, रहते आस लगाए और, काले के संग प्रीत लगाकर हो जाते बदनाम ।।
कृष्ण कन्हईया आयो मन में मोहन मुरली बजाओ । कान्ति अनुपम नील पद्मसम सुन्दर रूप दिखाओ । सुनाओ सुमधूर नुपूर गुंजन “राधा, राधा” करि फिर फिर वन वन प्रेम-कुंज में फूलसेज पर मोहन रास रचाओ ; मोहन मुरली बजाओ । राधा नाम लिखे अंग अंग में, वृन्दावन में फिरो गोपी-संग में, पहरो गले वनफूल की माला प्रेम का गीत सुनाओ, मोहन मुरली बजाओ ।
खेलत वायु फूलवन में, आओ प्राण-पिया । आओ मन में प्रेम-साथी आज रजनी, गाओ प्राण-पिया ।। मन-वन से प्रेम मिलि खेलत है फूलकली, बोलत है पिया पिया बाजे मुरलिया ।। मन्दिर में राजत है पिया तब मूर्ती । प्रेम-पूजा लेओ पिया, आओ प्रेम साथी ।। चाँद हसे तारा साथे आओ पिया प्रेम-रथे सुन्दर है प्रेम-राती आओ मोहनिया आओ प्राण पिया ।।
चक्र-सुदर्शन छोड़के मोहन तुम बने बनवारी । छिन लिए हैं गदा-पदम सब मिल करके ब्रजनारी ।। चार भूजा अब दो बनाए, छोड़के बैकुंठ बृज में आए रास रचाए बृज के मोहन बन गए मुरलीधारी ।। सत्य़भामा को छोड़के आए, राधा प्यारी साथ में लाए । बैतरणी को छोड़के बन गए यमुना के तटचारी ।।
चंचल सुन्दर नन्दकुमार गोपी चितचोर प्रेम मनोहर नवल किशोर । बाजतही मन में बाणरि की झंकार, नन्दकुमार नन्दकुमार नन्दकुमार ।। श्रवण-आनन्द बिछुआ की छंद रुनझुन बोले नन्द के अंगना में नन्दन चन्द्रमा गोपाल बन झूमत डोले डगमग डोले, रंगा पाव बोले लघू होके बिराट धरती का भार । नन्दकुमार नन्दकुमार नन्दकुमार ।। रूप नेहारने आए लख छिप देवता कोइ गोप गोपी बना कोइ वृक्ष लता । नदी हो बहे लागे आनन्द के आँसू यमुना जल सुँ प्रणता प्रकृति निराला सजाए, पूजा करनेको फूल ले आए बनडार । नन्दकुमार नन्दकुमार नन्दकुमार ।।
जपे त्रिभूवन कृष्ण के नाम पवन जपे श्रीकृष्ण के नाम श्रीकृष्ण के नाम राधाकृष्ण नाम राधाकृष्ण नाम राधाकृष्ण नाम । गगन हात में लिए तारा की माला जपे कृष्णनाम फूलकली के माला लिए तारा की माला जपे कृष्णनाम । जपत पंछी सब कोयला पपीहारा वही नाम अविराम । राधाकृष्ण नाम राधाकृष्ण नाम राधाकृष्ण नाम ।। (वही) नाम जपते हैं सावन धारा, जपे नदी जल वही नाम प्यारा, सांझ सकार के रंग में वो नाम का इशारा, वो नाम समुन्दर जपते दिवस शाम । राधाकृष्ण नाम राधाकृष्ण नाम राधाकृष्ण नाम ।।
झूले कदम के डार के झूलना पे किशोरी किशोर, देखे दोउ एक एकके मुख को चन्द्रमा चकोर जैसे चन्द्रमा चकोर होके प्रेम नेशा बिभोर । मेघ मृदंग बाजे वही झूलना के छंद में, रिम झिम बादर बरसे आनन्द में, देखने जुगल श्रीमुख चंद को गग घेरी आए घनघटा घोर ।। नवनीर बरसने को चातकिनी चाय, वैसे गोपी घनश्याम देख तृष्णा मिटाय, सब देव देवी चन्दना गीत गाय, झरे वर्षा में त्रिभूवन की आनन्दाश्रुलोय ।।
तुम प्रेम के घनश्याम मै प्रेम की श्याम-प्यारी । प्रेम का गान तुम्हारे दान मै हूँ प्रेम भीखारी ।। हृदय बीच में यमुना तीर--- तुम्हारी मुरली बाजे धीर नयन नीर की बहत यमुना प्रेम से मतवारी ।। युग युग होये तुम्हारी लीला मेरे हृदय बन में, तुम्हारे मोहन-मन्दिर पिया मेहत मेरे मन में । प्रेम-नदी नीर नित बहती जाय, तुम्हारे चरण को काँहू ना पाय, रोये श्याम-प्यारी साथ बृजनारी आओ मुरलीधारी ।।
तुम हो मेरे मन के मोहन मै हूँ प्रेम अभिलाषी । तुम्हारी माया हरती मन को नही अपराधी ये दासी ।। प्रभूजी तुम्हारी मूर्ती श्यामबिहारी मोहत योगी आवरा संसारी, मै तो अबला बृज की नारी उन चरण तीरथ-वासी । मै हूँ तुम्हारे मोहन रूप निहारे नर भी आपन भूलते सारे रमणी भाओ प्रभू जागत मन में चाहे हो सन्यासी । प्रभूजी नाही अपराधी दासी । प्रभूजी
देखोरी मेरो गोपाल धरो है नवीन नट की साज ! रुनक झुनक नुपूर बाजे उनके चरणों पर आज (देखो सब ) लचक लचक चलते मोहन नचत मुकुट शीश उन सन गोप गोपीन सब आनन्द मगन चाँद पारत लाज (देखो सब) सुन्दर मोहन रूप नेहारी चाँद पारत लाज निर्मल नील अम्बर और छन छन अमिया सागर कौन बचो है कृष्ण कुँवर गिरधर नटराज नाचत जत तिन लोक बिसरत काज ।।
प्रेम नगर का ठिकाना कर ले प्रेम नगर का ठिकाना । छोड़ कर ये दो दिन का घर वही राह पे जाना ।। दुनिया दौलत है सब माया, सुख दुख है जगत का काया, दुख तो तू गले लगा ले – आगे न पछताना ।। आती है जब रात आँधारी छोड़ तुम माया बन्धन-भारी, प्रेम नगर की कर तैयारी, आया है परवाना ।।
यमुना के तीर पे सखीरी सुनी मै चंचल साँवर कुँवर के बाँसुरी । बिसर गई नीर भरने को फिर आ गई घर, छोड़ के गागरी । नाम ले बजाने लगे बाँसुरिया निलाज बाँसुरिया बन में पापिहा बोल उठा पियापिया पनघट पे हँसने लगी गोकुल की नागरी । निसदिन मोहे साँस ननद देत गारी निर्मल मोरे कुल मे लगे कृष्णकारी जहाँ जाऊँ देखते पाँऊ खड़े हैं किशोर हरि ।
राधा श्याम किशोर प्रीतम कृष्ण गोपाल, बनमाली बृज के गोपाल । कृष्ण गोपाल श्रीकृष्ण गोपाल श्रीकृष्ण गोपाल ।। कभी राम राघव कभी श्याम माधव कभी बने केशव यादव भूपाल । कृष्ण गोपाल श्रीकृष्ण गोपाल श्रीकृष्ण गोपाल ।। कूंजबिहारी मुरलीधारी वृन्दावन बसे गोपी मनहारी । कभी मथुरापती कभी पार्थसारथी वृज में यशोदा और नन्द के लाल ।। कृष्ण गोपाल श्रीकृष्ण गोपाल श्रीकृष्ण गोपाल ।। शोभे गले में तोहार फूल कदम के हार बजती चरणों में मधुर झाँझन झंकार ।। कालीय दमन कभी करे हो मुरारी काननचारी शिखी पाखाधारी साँवर सुन्दर गिरिधारीलाल । कृष्ण गोपाल श्रीकृष्ण गोपाल श्रीकृष्ण गोपाल ।।
सुन्दर हो तुम मनमोहन हो नेरे अंतरयामी । फले फूले हो तुम दुनिया में तुम हो मेरे स्वामी ।। जग में बिराजत तुम्हारी माया, तुम्हारी दान है अमोसक काया इन नैनों की ज्योति हो तुम तुम ही हो दिन यामी ।। चन्द्र सूरज तुम्हारे रूप है, क्षण में बादल, क्षण में धूप है, शक्ति मूक्ति तुम हो मेरे मोहे उधारो स्वामी ।।
सोवत जागत आँठू जान राहत प्रभू मन में तुम्हारे ध्यान । रात अंधेरी से चाँद समान प्रभू उज्वल कर मेरा प्राण ।। एक सूर बोलो झिओर सारी रात— ऐसे ही जपतूहू तेरा नाम हे नाथ, रोम रोम में रम रहो मेरे एक तुम्हारा गान ।। गई बन्धू कुटुम स्वजन— त्यज दिनू मैं तुम्हारे कारण, तुम हो मेरे प्राण-आधारण, दासी तुम्हारी ज्ञान ।।
हर का भजन कर ले मनुआ हर का भजन कर ले । कठिन भौवर भव सागर माही नाम-नईया से तरले (मनुआ) ।। दुनिया में आज लागो है मेला, सुख दुख का खेल निराला । तू तो कर ले नाम का सौदा नाम से जी भर ले ।। माया का ये वतन बना है, माया जाल इस जग में तना है । नाम मंत्र तू जब ले के ओ ना संकट को हर ले ।।