कवि हरिश्चन्द्र उपाध्याय के पिताजी अवकाश प्राप्त, हिंदी के प्रवक्ता हैं। इसी सौभाग्य के कारण उन्हे काफी सारे साहित्यकारों, लेखकों एवं कविओं को पढ़ने को मिला और उनका साहित्य में रूचि बड़ते चली गयी। कवि आइ.एम.टी. गाजिआबाद से ऍम बी ए तथा अपटेक से कंप्यूटर में डिप्लोमा कर चुके हैं।
कवि अब तक लगभग ७६ कवितायेँ तथा ५ कहानिया लिख चूके हैं। जिनमे से कुछ समय समय पर दैनिक जागरण, अमर उजाला, पंखुड़ी (उधम सिंह नगर से प्रकाशित) तथा कत्युरी मानसरोवर (अल्मोड़ा से प्रकाशित) में प्रकाशित हुई है। कवितायेँ और कहानियां लिखने के अलावा उन्हे शेरों शायरी लिखना, घूमना और बायेकिंग पसंद है। उनका मानना है की कवि एक संवेदन शील व्यक्ति होता है। जरुरी नहीं जब हमें चोट लगे तभी हमें दूसरों के दर्द का एह्सास हो। ये निर्भर करता है हमारी संवेदनशीलता पे की हम दूसरों को कितना समझ पाते है। कितना उनकी दिल की गहराईयों में जा सकते हैं।
हम मिलनसागर में उनका कविता प्रकाशित कर बहुत आनंदित हैं। हरिश्चन्द्रजी से सम्पर्क - hcupadhyay@in.com ,
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