कवि लक्ष्मी पालपौरी गढ़वाल के रहनेवाली हैं। उन्होंने भोपाल से 12 वीं क्लास के शिक्षा प्राप्त करने के बाद हरिद्वार के हेमवती नंदन बहूगुणा कॉलेज से 2006 में बि.कॉम. पास किया है। चार भाइ बहनों में सबसे छोटी लक्ष्मीजी, अपने माताजी और छोटे भइया के साथ दिल्ली मे रहती है।
युवा पिढ़ी के प्रतिनिधित्व करने वाली लक्ष्मीजी कविता तथा कहानियाँ लिखने के शौकीन हैं। उनके पिता एक बहुत ही प्रतिभावान व्यक्ति थे। बाँसुरी, हारमोनियम, तबला, सितार, डपली जैसे वाद्ययंत्र बजाने में माहिर थे। ज़ाहीर है कि ऐसे पिता के बेटी होकर लक्ष्मीजी भी संगीत में रुचि रखती हैं। 2001 में पिताजी का स्वर्गवास हो जाने के बाद लक्ष्मीजी नें कविता लिखना शुरु किया। उनका मानना है कि कवि एक बेहद संवेदनशील इनसान होता है। वह दूसरों के तकलिफ़ समझ सकता है, इसलिए वह उनके दुःख को शब्दोंमें पिरो सकता है।
हम मिलनसागर में उनका कविता प्रकाशित कर बहुत आनंदित हैं।
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