कवि प्रदीप के गीत
*
आंखों से दूर दूर है
रचना - कवि प्रदीप
संगीत - एस.डी. बर्मन
कलाकार - लता मंगेशकर
फिल्म - मशाल

.            *************        
.                                                            
सूची मे वापस . . .   



मिलनसागर
*
आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की
रचना - कवि प्रदीप
संगीत - हेमन्त कुमार
कलाकार - प्रदीप कुमार
फिल्म - जागृति

आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वन्दे मातरम वन्दे मातरम वन्दे मातरम वन्दे मातरम

उत्तर में रखवाली करता पर्वतराज विराट है
दक्षिण में चरणों को धोता सागर का सम्राट है
जमुना जी के तट को देखो गंगा का ये घाट है
बाट-बाट पे हाट-हाट में यहां निराला ठाठ है
देखो ये तस्वीरें अपने गौरव की अभिमान की,
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वन्दे मातरम वन्दे मातरम वन्दे मातरम वन्दे मातरम

ये है अपना राजपूताना नाज इसे तलवारों पे
इसने सारा जीवन काटा बरछी तीर कटारों पे
ये प्रताप का वतन पला है आज़ादी के नारों पे
कूद पड़ी थी यहां हज़ारों पद्‍मिनियां अंगारों पे
बोल रही है कण कण से कुरबानी राजस्थान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वन्दे मातरम वन्दे मातरम वन्दे मातरम वन्दे मातरम

देखो मुल्क मराठों का ये यहां शिवाजी डोला था
मुगलों की ताकत को जिसने तलवारों पे तोला था
हर पावत पे आग लगी थी हर पत्थर एक शोला था
बोली हर हर महादेव की बच्चा बच्चा बोला था
यहां शिवाजी ने रखी थी लाज हमारी शान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वन्दे मातरम वन्दे मातरम वन्दे मातरम वन्दे मातरम

जलियां वाला बाग ये देखो यहां चली थी गोलियां
ये मत पूछो किसने खेली यहां खून की होलियां
एक तरफ बंदूकें दन दन एक तरफ थी टोलियां
मरनेवाले बोल रहे थे इनकलाब की बोलियां
यहां लगा दी बहनों ने भी बाजी अपनी जान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वन्दे मातरम वन्दे मातरम वन्दे मातरम वन्दे मातरम

ये देखो बंगाल यहां का हर चप्पा हरियाला है
यहां का बच्चा-बच्चा अपने देश पे मरनेवाला है
ढाला है इसको बिजली ने भूचालों ने पाला है
मुट्ठी में तूफान बंधा है और प्राण में ज्वाला है
जन्मभूमि है यही हमारे वीर सुभाष महान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वन्दे मातरम वन्दे मातरम वन्दे मातरम वन्दे मातरम


.                     *************        
.                                                            
सूची मे वापस . . .   



मिलनसागर
*
उपर गगन विशाल
रचना - कवि प्रदीप
संगीत - एस.डी. बर्मन
कलाकार - मन्ना दे
फिल्म - मशाल


उपर गगन विशाल,
नीचे गहरा पाताल
बीच में धरती वाह मेरे मालिक
तूने किया कमाल
तूने किया कमाल
उपर गगन विशाल
एक फूँक से रत दिया तूने
सूरज अगन का गोला
एक फूँक से रचा चन्द्रमा,
लाखों सितारों का टोला


.                     *************        
.                                                            
सूची मे वापस . . .   



मिलनसागर
*
इनसान का इनसान से हो भाईचारा
रचना - कवि प्रदीप
संगीत - सी. रामचन्द्र
कलाकार - मन्ना दे
फिल्म - पैगाम


इनसान का इनसान से हो भाईचारा
यही पैगाम हमारा, यही पैगाम हमारा
नये जगत में हुए पुराना
ऊँच नीच का किस्सा


.                     *************        
.                                                            
सूची मे वापस . . .   



मिलनसागर
*
चल अकेला, चल अकेला, चल अकेला
रचना - कवि प्रदीप
संगीत - ओ.पी. नैयर
कलाकार - मुकेश
फिल्म - सम्बन्ध        

चल अकेला, चल अकेला, चल अकेला
तेरा मेला पीछे छूटा, राही चल अकेला
हजारों मील लम्बे रास्ते, तुझको बुलाते
वहां दुखड़े सहने के वास्ते तुझको बुलाते
है कौन सा इनसान यहां पर जिसने दुख न झेला
चल अकेला, चल अकेला, चल अकेला

तेरा कोई साथ न दे तो तु खुद से प्रीत जोड़ ले
बिछौना धरती को करके अरे आकाश ओढ़ ले,
यहां पूरा खेल अभी जीवन का, तूने कहां है खेला
चल अकेला, चल अकेला, चल अकेला
तेरा मेला पीछे छूटा, राही चल अकेला


.                     *************        
.                                                            
सूची मे वापस . . .   



मिलनसागर
*
कैसे मनाए दिवाली हम लाला
रचना - कवि प्रदीप
संगीत - सी. रामचन्द्र
कलाकार - मोहम्मद रफी
फिल्म - पैगाम
 

कैसे मनाए दिवाली हम लाला
अपना तो बारह महीने दीवाला
हम तो हुए देख ठन ठन गोपाला


.                     *************        
.                                                            
सूची मे वापस . . .   



मिलनसागर
*
कहां है हम आज मत पूछो
रचना - कवि प्रदीप
संगीत - सी. रामचन्द्र
कलाकार - मोहम्मद रफी और आशा भोंसले
फिल्म - पैगाम        

आशा  : कहां है हम आज मत पूछो एक झूठा दिलासा है
.          हमें मत इस तरह टालो हमारा प्यार प्यासा है
.          जवानी में अकेलेपन की घड़ियां हमको ना भाए
रफी   : इजाजत हो तो हम आएं


.                     *************        
.                                                            
सूची मे वापस . . .   



मिलनसागर
*
सुनो सुनो हे पंडित सुनो सुनो मौलाना
रचना - कवि प्रदीप
संगीत - सी. रामचन्द्र
कलाकार - मोहम्मद रफी
फिल्म - पैगाम

सुनो सुनो हे पंडित सुनो सुनो मौलाना
अपना ये संसार हुआ है बिलकुल पागलखाना
बदला सारा जमाना बाबू बदला सारा जमाना
सत्यनारायण की कथा में अब तो बजता है फिल्मी गाना


.                     *************        
.                                                            
सूची मे वापस . . .   



मिलनसागर
*
सुनो रे भैया हम लाए हैं एक खबर मस्तानी
रचना - कवि प्रदीप
संगीत - सी. रामचन्द्र
कलाकार - मोहम्मद रफी
फिल्म - पैगाम        

सुनो रे भैया हम लाए हैं एक खबर मस्तानी
आज किसी जालिम की मरने वाली है नानी
अरे नानी, अरे नानी, अरी नानी


.                     *************        
.                                                            
सूची मे वापस . . .   



मिलनसागर